रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं
आधुनिक युग में फिर से कृष्ण की जरुरत
राकेश सोनी
+91-94627-79697
किसी भी देश की संस्कृति वहां की आध्यात्मिक विचार-धाराओं से ही जन्म लेती है। सभी त्योहारों एवं पर्वों के पीछे कोई न कोई पुरातन-धार्मिक प्रेरणा जरुर होती है। रक्षाबंधन का आधुनिक स्वरूप भी हिन्दू धार्मिक परम्पराओं व प्राच्य वैदिक विज्ञान से ही आया है।
आज 20 अगस्त 2013 को फिर रक्षा-बंधन का पर्व समूचे देश में हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है, इस पुरातन धार्मिक परम्परा पर मैं भी अपनी और से दो शब्द प्रस्तुत कर रहा हूं, मुझे उम्मीद है कि आप भी मेरे उक्त विचारों से सहमत होंगे ।
हम आज के बदलते परिवेश में रिश्तों के मायने भूलते जा रहे हैं। पाश्चात् संस्कृति के प्रभाव से ग्रसित होकर वास्तविक रिश्तों की बलि चढ़ा रहे है, बहिन के लिए भाई क्या होता है और भाई के लिए बहिन क्या होती है, ऐसा प्रतीत होता है कि यह मान-मर्यादाएं अब सिर्फ किताबों, ग्रंथों या यूं कहें महाभारत काल के उस स्वर्णिम युग तक ही सीमित रह गए हैं शायद, आधुनिकता की अंधी दौड़ में आध्यात्म कहीं खो गया है, वर्ना एक जमाना वो था जब भगवान श्री कृष्ण जैसे धर्म भाई द्रौपदी जैसी बेबस अबलाओं की लाज बचाने सहज ही उपस्थित हो जाया करते थे, किंतु आज के इस युग में ऐसा कोई भाई नज़र नहीं आता है, जो द्रौपदी की पुकार सुने और रक्षा के लिए आगे आ जाए।
राखी के नाम से प्रचलित रक्षा-बंधन का यह पर्व प्रतिवर्ष हमें हमारी संकृति की याद दिलाकर पवित्र रिश्ते को कालांतर तक ऐसे ही निभाते रहने की सीख देता है।आओ आज इस पावन अवसर पर यही संकल्प ले, कि- हर हाल में हम अपनी बहन की रक्षा करेगें।
हम आज के बदलते परिवेश में रिश्तों के मायने भूलते जा रहे हैं। पाश्चात् संस्कृति के प्रभाव से ग्रसित होकर वास्तविक रिश्तों की बलि चढ़ा रहे है, बहिन के लिए भाई क्या होता है और भाई के लिए बहिन क्या होती है, ऐसा प्रतीत होता है कि यह मान-मर्यादाएं अब सिर्फ किताबों, ग्रंथों या यूं कहें महाभारत काल के उस स्वर्णिम युग तक ही सीमित रह गए हैं शायद, आधुनिकता की अंधी दौड़ में आध्यात्म कहीं खो गया है, वर्ना एक जमाना वो था जब भगवान श्री कृष्ण जैसे धर्म भाई द्रौपदी जैसी बेबस अबलाओं की लाज बचाने सहज ही उपस्थित हो जाया करते थे, किंतु आज के इस युग में ऐसा कोई भाई नज़र नहीं आता है, जो द्रौपदी की पुकार सुने और रक्षा के लिए आगे आ जाए।
राखी के नाम से प्रचलित रक्षा-बंधन का यह पर्व प्रतिवर्ष हमें हमारी संकृति की याद दिलाकर पवित्र रिश्ते को कालांतर तक ऐसे ही निभाते रहने की सीख देता है।आओ आज इस पावन अवसर पर यही संकल्प ले, कि- हर हाल में हम अपनी बहन की रक्षा करेगें।
रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं
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